दूसरे दिन की भगवत कथा ने श्रोताओं को झुमने पर मजबूर कर दिया।

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FARIDABAD(NCRCRIMENEWS.COM)RADHIKA BEHL: व्यास के विचलित मन को देख नारद के द्वारा दिए गए उत्तर के वर्णन को सोमवार को एनएच पांच स्थित राधा सर्वेश्वर मंदिर के संस्थापक संत मुनिराज जी महाराज सामुदायिक भवन बौद्ध विहार पार्क, मुल्ला होटल के नजदीक एनएच तीन, संजय कालोनी एनआईंटी फरीदाबाद में चल रही श्री मद् भगवत गीता के दूसरे दिन श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। दोपहर दो बजे से शुरू हुई कथा के दूसरे दिन कथा व्यास मुनिराज जी ने श्रोताओं को बताया कि व्यास के मन में शांति न होने को देखकर नारद जी ने उनसे अशांति का कारण पुछा तो वेदक जी ने उन्हे बताया कि उन्होने कई वेद व ग्रंथ लिखे है, लेकिन उनके मन को अभी तक भी शांति नही मिली है। जिस पर नारद जी ने ऋर्षियों ने व्यास जी की परेशानी को दूर करने का कारण जाना और व्यास जी को आकर बताया कि वह भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए एक ग्रंथ लि ो, जिस पर व्यास जी ने भगवत गीता लिखी। जिसमें भगवान के 24 अवतारों का वर्णन किया। कथा के दौरान मुनिराज जी ने भगवत गीता की हिरणाकश्यपु और हिरणाछ की कथा का वर्णन किया। जिसमें उन्होने बताया कि इन दोनों भाईयों ने भगवान को रोका था। जिस पर भगवान ने अवतार लेकर इन्हे समाप्त किया। इसके साथ ही उनहोने कश्यव ऋषि की कहानी का भी वर्णन किया। जिसमें उन्होने कश्यप ऋर्षि के बारे में बताया कि उनकी दो पत्नी थी, जिसमें एक दित्ती और दूसरी अदित्ती थी, दोनों पत्नी में एक से राक्षसों और दूसरी से देवाओं का जन्म हुआ था। व्यास जी के द्वारा गाऐं गये भजनों पर दूसरे दिन की भगवत कथा ने श्रोताओं को झुमने पर मजबूर कर दिया। दूसरे दिन हुई इस कथा में सीमा त्रिखा मु यातिथि के रूप में मौजूद थी। कथा के दौरान निकाली गई झाकिंयों को देखकर भक्त चकित रह गए।

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