पितृदोष के निवारण हेतु हुआ विश्व का प्रथम पितृ गायत्री महायज्ञ

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फरीदाबाद 27 जनवरी।(RADHIKA BEHL) श्री अद्भुत धाम हनुमान मंदिर सैक्टर 16 में जनकल्याण के लिये समस्त विश्व की शांति हेतु पितृ गायत्री महायज्ञ किया गया, ये महायज्ञ देश में ही नहीं बल्कि पूरे भूमण्डल में पहला ऐसा महायज्ञ हैं जिसमें अपने पितृों के लिये त्रिपिण्डी श्राद्ध किया है। इस प्रथम पितृ गायत्री महायज्ञ में सैंकडों भक्तों ने हिस्सा लिया, जिन्हें सैंकडों पंडितों ने एक साथ मंत्राच्चरण के साथ श्राद्ध करवाया। श्राद्ध के उपरांत दशहरा मैदान में बडा महायज्ञ किया गया जिसमें सभी पंडितों ने अपने अपने यजमानों की ओर से आहूति डाली। इस पितृ गायत्री महायज्ञ के करने से लोगों के जीवन से पितृदोष का निवारण होता है। महंत श्री लक्ष्मीनारायण जी महाराज पीठाधीश्वर ने बताया कि ये महायज्ञ 9 माह तक प्रत्येक महीने की अमावस्या को किया जायेगा। भारत देश ऋषि मुनियों की तपोभूमि कहा जाता है यहां हजारों बर्षो से यज्ञ महायज्ञ होते हुए आ रहे हैं मगर फरीदाबाद में जो महायज्ञ आज हुआ है ऐसा कभी पहले नहीं हुआ, श्री अद्भुत धाम हनुमान मंदिर सैक्टर 16 में जनकल्याण के लिये समस्त विश्व की शांति हेतु पितृ गायत्री महायज्ञ किया गया, ये महायज्ञ पितृों के लिये किया गया है जिसके करने से लोगों के जीवन में लगे हुए पितृदोषों का निवारण होता है। इस महायज्ञ से उन लोगों को लाभ मिलता है, जिनके बार-बार काम अटकते रहते हैं, जिनकी व्यापार नोकरी, काम धंधे में लगातार अडचनें आती हैं, बार-बार बिमार पडते हैं, दिन रात मेहनत करने के बाद भी उन्हें मेहनत का फल नहीं मिल पाता, ऐसे लोगों के जीवन में पितृदोष होता है जिसका निवारण पितृ गायत्री महायज्ञ ही है। जो कि श्री अद्भुत धाम हनुमान मंदिर सैक्टर 16 में सुबह 9 बजे से 11 बजे तक किया गया। आयोजन में सैंकडों भक्तों ने भाग लिया जिनसे सैंकडों पंडितों ने मंत्राच्चारण करते श्राद्ध करवाया। श्राद्ध के सम्पूर्ण होने के पश्चात सभी भक्तजन ढोल नगाडों की धमक पर नाचते झूमते हुए दशहरा मैदान पहुंचे जहां विशाल महायज्ञ का किया गया।  इस आयोजन के बारे में अधिक जानकारी देते हुए महंत श्री लक्ष्मीनारायण जी महाराज पीठाधीश्वर ने बताया कि आयोजन को त्रिपिण्डी श्राद्ध भी कहते हैं। इसका अर्थ है पितामह, परपितामह और प्रद्ध परपितामह की गति प्राप्त करवाने हेतु करवाया जाता है, साथ ही आज दुनिया में प्राकृतिक आपदायें आ रही हैं कहीं बादल फट जाता है तो कहीं धरती धस जाती है तो कहीं अचानक से जंगलों में आग लग जाती इन्हीं प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिये इस पितृ गायत्री महायज्ञ का समय समय पर होना आवश्य है। इसलिये उन्होंने फेंसला लिया है कि 9 माह तक प्रत्येक महीने की अमावस्या को पितृ गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया जायेगा। इस महायज्ञ का आयोजन महंत श्री लक्ष्मीनारायण जी महाराज पीठाधीश्वर ने करवाया, जिसमें वाराणसी से आचार्य ब्रह्मदेव, वाराणसी से सुरेन्द्र पाण्डेय, इलाहाबाद से आचार्य उमाशंकर, चित्रकूट से ओमप्रकाश, और नासिक, गया, वृद्धावन जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों से दर्जनों महंत महात्माओं ने हिस्सा लिया।

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